Aadhar Card update: आधार की सुरक्षा पर सरकार ने कसी लगाम। UIDAI ने जारी की सख्त चेतावनी – गलत जानकारी देना, पहचान चुराना या डेटा का दुरुपयोग करने वालों पर अब होगी सीधी कार्रवाई। जानिए क्या हैं नए नियम और सजा के प्रावधान।
आधार से जुड़ी धोखाधड़ी और डेटा सुरक्षा को लेकर सरकार ने अब बड़ा कदम उठाया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने सभी नागरिकों और संस्थाओं को चेतावनी दी है कि किसी भी तरह के डेटा दुरुपयोग, गलत जानकारी या पहचान की चोरी को अब गंभीर अपराध माना जाएगा।
यह सख्ती इसलिए की जा रही है क्योंकि देश में आधार का उपयोग हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ा है, बैंकिंग सेवाओं से लेकर सरकारी योजनाओं तक, हर जगह आधार एक अहम पहचान बन चुका है। ऐसे में इसके डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और नागरिक दोनों की जिम्मेदारी है।
किन पर होगी कार्रवाई।
UIDAI ने बताया है कि अब ऐसे सभी लोगों पर निगरानी रखी जा रही है जो नियमों का उल्लंघन करते हैं या गलत जानकारी देते हैं।
फर्जी जानकारी देने वाले: अगर कोई व्यक्ति आधार पंजीकरण या अपडेट के समय झूठी बायोमेट्रिक या जनसांख्यिकीय जानकारी देता है, तो उसे कारावास या भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
पहचान चुराने वाले: किसी और के नाम, फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन का इस्तेमाल करके आधार बनवाने या अपडेट कराने वालों पर अब तुरंत कार्रवाई होगी।
डेटा का गलत इस्तेमाल करने वाले: नामांकन या प्रमाणीकरण के समय प्राप्त जानकारी को किसी तीसरे व्यक्ति से साझा करना अब अपराध माना जाएगा।
अनाधिकृत संस्थाएं: UIDAI की अनुमति के बिना नागरिकों का डेटा प्रयोग करने वाली कंपनियों पर भी बड़ी कार्रवाई होगी।
कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान।
UIDAI ने साफ किया है कि अब गलत काम करने वालों को कठोर सजा मिलेगी। व्यक्तिगत अपराधों के मामलों में तीन साल तक की कैद और ₹10,000 तक का जुर्माना हो सकता है। कंपनियों के लिए यह राशि बढ़ाकर ₹1 लाख तक कर दी गई है।
अगर कोई संस्था या व्यक्ति डेटा भंडारण प्रणाली यानी CIDR में हैकिंग या छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है, तो उस पर 10 साल तक की जेल और ₹10 लाख जुर्माना का प्रावधान लागू होगा। बड़े पैमाने पर डेटा लीक या नियमों के उल्लंघन में जुर्माना ₹1 करोड़ तक लगाया जा सकता है।
UIDAI ने मजबूत की सुरक्षा व्यवस्था।
प्राधिकरण ने बताया है कि अब आधार सिस्टम में कई स्तरों पर बायोमेट्रिक सुरक्षा को अपडेट किया गया है। हर व्यक्ति के फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन को उन्नत सॉफ्टवेयर की मदद से क्रॉस-वेरिफाई किया जाता है ताकि गलत प्रविष्टियाँ तुरंत पकड़ में आ सकें।
UIDAI ने कई आधार केंद्रों के ऑपरेटरों को ब्लैकलिस्ट किया है, जिन पर नियम तोड़ने या डेटा के दुरुपयोग के आरोप लगे थे। अब ऐसे ऑपरेटरों को दोबारा आधार सेवा चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
नागरिकों की जिम्मेदारी भी जरूरी।
सरकार और UIDAI जहां अपनी सुरक्षा प्रणाली मजबूत कर रहे हैं, वहीं नागरिकों की भी बड़ी भूमिका है। लोगों को चाहिए कि वे अपना आधार नंबर किसी अज्ञात वेबसाइट, ऐप या व्यक्ति के साथ साझा न करें। वैरिफिकेशन या अपडेट केवल अधिकृत केंद्रों पर ही कराएं और किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
UIDAI का संदेश बिल्कुल साफ है, “आपकी पहचान, आपकी सुरक्षा।” यदि नागरिक सतर्क रहेंगे और नियमों का पालन करेंगे, तो न केवल उनका डेटा सुरक्षित रहेगा बल्कि देश की डिजिटल पहचान प्रणाली भी और मजबूत बन सकेगी।